रस्ता कब कहता चल मुझ पर तू ईश्वर कब कहता भज मुझको तू मंजिल को पाने के लिए खुद चलना पडता है अवसाद मिटाने के लिए उसको भजना पडता है ..... मिलाप सिंह भरमौरी शुभ संध्या दोस्तो ......
सब तेरे हवाले कर रखा है जो भी कर तु तेरी मर्जी कुछ मांगूगा गर तुमसे तो वो होगी मेरी खुदगर्जी बदल के रख दूँ तुफानों को एेसी भी मैं ढाल नहीं हूँ पर्वत का सीना चीर के रख दूँ तिनक...
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