नशा कोई भी हो सरूर आ ही जाता है। उठी हुई नजर में कसूर आ ही जाता है। सच में... हैरान नहीं हूँ कुछ भी मैं तेरे लफ़्ज़ों पर कामयाबी पे सबको गरूर आ ही जाता है। ........ मिलाप सिंह भरमौरी।
दूर रहने का मलाल होता है। बसल का हर लम्हा कमाल होता है। क्या तुम भी रहते हो उदास इस तरह... बिछुड़ के तुमसे मेरा जो हाल होता है। .....… मिलाप सिंह भरमौरी
हर छल को अपनाते हो फिर भी खुद को साफ बताते हो। थोडा तो समझ हमें भी आता है जो सबको तुम समझाते हो। जरूर गलत होंगे वो भी बेशक यह स्वीकार हर्ष से करता हूँ। पर दोस्त तुम भी वैसे हो नह...
जिसमें अपने आएं ही न मौका वो शानदार नहीं होता है। गरीबों को भ्रमाने वाला तो कोई जानदार नहीं होता है। सब कहने की बातें है साहिब तुम इन्हें ढकी ही रहने दो। पढा लिखा हर इंसान द...
जब रास्ता न दिखाई दे तो रुक जाना चाहिए। खतरा हो सिर फूटने का तो झुक जाना चाहिए। अरे गलत राय बनेगी तेरी उल्टी सीधी बातों से । जब कुछ भी समझ न आए तो चुप हो जाना चाहिए। ...... मिलाप सिं...
ख्बाईशें इसलिए भी इंसान की पूरी नहीं होती । क्योंकि चीज वो भी मांगता है जो जरूरी नहीं होती । एक के बाद एक अपनी इच्छाओं को बढा लेता है। बेवजह मजबूर होता है लेकि...
बिना हाथ चलाए कभी नैइया पार नहीं होती काट सके सच्ची लगन को ऐसी कोई धार नहीं होती चाह रख मंजिल को पाने की दिल में हमेशा क्योंकि चाहने वालों की कभी हार नहीं होती क्योंकि चाहन...
जब भी याद आती है तो दिल उदास होता है तुमसे दूर होने का बहुत बुरा एहसास होता है जैसे मुझे काटने को आती है ये दिवारे घर की और फिर चुपके से यह मासूम पूरी रात रोता है ............ मि...
बच कर रहना उनसे जो खिलाते पिलाते हैं कुछ ही समय बाद वो असर भी दिखाते हैं अगर बन न पाए फिर भी कोई काम उनका तो ओर कुछ नहीं तो तू तडाक पर ही उतर आते हैं ......... मिलाप सिंह भरमौरी
कई बार मन में यह ख्याल आते हैं चलो इक बार फिर उस मोड पर जाते हैं ______________________________ याद कर के उन हसीन लम्हों को तन्हाई में कुछ पल फिर से मुस्कुराते हैं ______________________________ सूख चुकी है मिट्टी तपन है अब हर ओर ...
तुझे नहीं पता कितना चाहते हैं तुझको आप ही लगते हैं दूर से देखते है जिसको तेरा ही ख्याल रहता है हरपल मेरे दिल में क्या कभी सच में तुम भी चाहोगी मुझको ..... मिलाप सिंह भरमौरी
फिर अपना ही समझ लेता हूँ तुझको अनजाने में ही अगर देख लो तुम मुझको न जाने क्या क्या खाब सजा लेता हूँ फिर मैं कोई बात अगर कर लो मुझसे तुम तो ....मिलाप सिंह भरमौर...
वादा तो कर बैठे हो तुम निभाओगे क्या सच में बहुत कठिन है राह उल्फत की चल पाओगे क्या सच में बडे हसीन लगते है नजारे जब देखते है बैठ के किनारे बहुत गहरा है समुंद्र इश्क का उतर पाओ...
दिल दुख जाता है सच कहने से पर झूठ को कैसे बिन पांव के चलने दें ठोक के कह दे बात हकीकत तू सबसे फिर जलते हैं कुछ लोग तो बेशक जलने दे ....... मिलाप सिंह भरमौरी