सूरज ने अब पकड बनाई हर ओर मची है त्राहि- त्राहि बदन हुआ पसीने से गीला अंदर बाहर हरसूं गर्मी छाई । नदी -नाले सब सूख रहे हैं पशु पक्षियों की शामत आई । कूलर पंखे सब फेल हो रहे गर्म ...
हर दाव से ज्यादा इक शराफत हमपे भारी है। अदावत करोगे हमसे औकात क्या तुम्हारी है। उसपे असर क्या करेगी बता अंजाम की बातें, जिसने तमाम जिंदगी अपनी इक साईकिल पे गुजारी है। .....मिलाप सिंह भरमौरी
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