आसान नहीं है

अभी दिन है कोई शाम नहीं है
अँधेरों का दूर तक नाम नहीं है

चलो देते हैं कोई बेतुका सा व्यान
कई दिनों से शहर में बवाल नहीं है

कुछ करें तो कदम रोक देते हैं
और न करें तो कहते हैं काम नहीं है

कि लूट लोगे दिलों को बस बातों से
सियासत इतनी भी आसान नहीं है

वो सब जनता है क्या हो रहा हैं यहां
पिछली पीढी जैसा अब इंसान हैं

      ....... मिलाप सिंह भरमौरी

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