रस्ता कब कहता चल मुझ पर तू ईश्वर कब कहता भज मुझको तू मंजिल को पाने के लिए खुद चलना पडता है अवसाद मिटाने के लिए उसको भजना पडता है ..... मिलाप सिंह भरमौरी शुभ संध्या दोस्तो ......
मुस्कुराहट तेरे होठों की दिल को छू जाती है खामोशी तेरे चेहरे की अंदर तक रुलाती है बहुत ढूंढ लिया सुकून को जगह जगह पर जाकर के पर राहत के मकाम की तुझ तक ही राह जाती है ..... मिलाप सि...
कहने को तो बस वो हमसे रूठ जाते हैं उन्हें क्या पता इससे कितने हम टूट जाते हैं नफरत सी होने लगती है हर शय से हमें जीने के खाव सभी जैसे मन से ही छूट जाते हैं ----- मिलाप सिंह भरमौरी
तुझको मनाने के लिए अब तू ही बता मैं क्या करूं तेरी खामोशी डसती है बिन बात किए मैं कैसे रहूं हर बात पर जिद्द ठीक नहीं दिल को दुखाना जीत नहीं मान भी जाओ मन के मालिक यह तीखे तीर कै...
बचपन में हम संग संग खेले स्कूल में भी साथ साथ पढे और अब अच्छे पडौसी की तरह सुख दुख में संग संग रहते हैं हिन्दू और मुस्लिम दुश्मन है क्यों कुछ देशों के लोग कहते हैं -------- मिलाप सिं...
मौका ही कब देता है यह संभलने का बैलेंस सब बिगाड देता है यह चलने का कभी एक्सीडेंट तो कभी दंगा फसाद बहुत बडा कारण है नशा किस्मत बिगडने का ---- मिलाप सिंह भरमौरी