रस्ता कब कहता चल मुझ पर तू ईश्वर कब कहता भज मुझको तू मंजिल को पाने के लिए खुद चलना पडता है अवसाद मिटाने के लिए उसको भजना पडता है ..... मिलाप सिंह भरमौरी शुभ संध्या दोस्तो ......
फिर अपना ही समझ लेता हूँ तुझको अनजाने में ही अगर देख लो तुम मुझको न जाने क्या क्या खाब सजा लेता हूँ फिर मैं कोई बात अगर कर लो मुझसे तुम तो ....मिलाप सिंह भरमौर...
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