अदबात

हर दाव से ज्यादा
इक शराफत हमपे भारी है।

अदावत करोगे हमसे
औकात क्या तुम्हारी है।

उसपे असर क्या करेगी
बता अंजाम की बातें,

जिसने तमाम जिंदगी अपनी
इक साईकिल पे गुजारी है।

.....मिलाप सिंह भरमौरी 

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