रूठ जाते हो

कुछ नहीं दिखता सब धुआँ सा लगता है

बहार का मौसम भी खिजा सा लगता है

कि रूठा न करो मुुुुझसे छोटी छोटी बातों पर तुम

रूठ जाते हो मुझसे तुम तो बहुत बुरा लगता है


        ........ मिलाप सिंह भरमौरी

Comments

Popular posts from this blog

मुश्किल

सौहार्द