यह असर है बस इक तेरी नजर का जो दे गई काम मुझे जिंदगी भर का उलझा दिया उसे तूने रिश्तों के भंवर में जो भूल जाता था अक्कसर रास्ता अपने घर का ... मिलाप सिंह भरमौरी
दिल करता है कभी कभी कि दिल को संभाल लूँ करता है परेशान हरपल जो उस नाम को निकाल दूँ अजीब सी हालत हो गई है उससे मिलने के बाद मेरी उसी का नाम आता है जुवां पे चाहे किसी का भी नाम लूँ ...
रस्ता कब कहता चल मुझ पर तू ईश्वर कब कहता भज मुझको तू मंजिल को पाने के लिए खुद चलना पडता है अवसाद मिटाने के लिए उसको भजना पडता है ..... मिलाप सिंह भरमौरी शुभ संध्या दोस्तो ......
छोड दिया था सबको तेरे खातिर..., लगा बैठा खून के रिश्तों को ठोकर l अब दौलत क्या गई तु भी छोड गई , अंजाम तो ऐसा ही होना था आखिर..l ........ मिलाप सिंह भरमौरी