छोटे से मन में कितने भाव बच्चे के से सतरंगी चाव। पल- पल पलटे पटल दृष्टि कभी मुक्कमल कभी आगाज़। कितनी प्रचण्ड कितनी शमन तरंगे मन की हो गई खाक। ये उछल कूद है तो करता रहेगा नम ह...
आसान नहीं होता सच को सच कहना। कितना कुछ पड़ता है भाई इससे सहना। दूर हो जाते हैं पोल खुलते ही अपने सब। और तन्हा- सा पड़ता है दुनिया में रहना। .......... मिलाप सिंह भरम...
बेटी - बेटा एक समान यूँ तो लोग सबके सामने कहते हैं। पर चोरी छुपके टोने - टोटके न जाने क्या - क्या वो करते है। लिंग भेद पर उनकी दृष्टि से शायद देवों को भी हैर...
मीठी- सी मुस्कान तेरी बहुत तंग करती है। क्या हैं मायने इसके जहन में जंग करती है। तेरा मिल जाना रोज राहों में इत्तफाक भी हो सकता है। मगर यह ख्वाहिश यूँही मोहब्बत के रंग भरती ...
ऐ दिल सुन कुछ सोचा भी है कहने से पहले। या यूंही बकवास प्रवचन दिया है। भई बातें करना तो बडा आसान है पर क्या कभी खुद पर भी अमल किया है। ........ मिलाप सिंह भरमौरी