Kudrat ki maya

शीतल , शुद्ध हवा चले
सुखदायी है पेडों की छाया
हरियाली की चादर ओढे
यही तो है कुदरत की माया

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Comments

Popular posts from this blog

मुश्किल

सौहार्द