रस्ता कब कहता चल मुझ पर तू ईश्वर कब कहता भज मुझको तू मंजिल को पाने के लिए खुद चलना पडता है अवसाद मिटाने के लिए उसको भजना पडता है ..... मिलाप सिंह भरमौरी शुभ संध्या दोस्तो ......
दिल करता है कभी कभी कि दिल को संभाल लूँ करता है परेशान हरपल जो उस नाम को निकाल दूँ अजीब सी हालत हो गई है उससे मिलने के बाद मेरी उसी का नाम आता है जुवां पे चाहे किसी का भी नाम लूँ ...
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