बिन कटारी से भी किस्से खत्म होते हैं । भर न पाएं कभी जो ऐसे जख्म होते है । मत ढूँढो तुम हथियार मेरी चोट का यारो। दुनिया में कुछ नजरों से भी कत्ल होते हैं । ------- ...
देख कर उसको यारो कुछ हमे यूँ आया जैसे कट लग गया हो बिजली का अंदर बैठे हुए सिलसिला आगे बढेगा मौहब्बत का इजहार करने से कुछ नहीं होगा खाव लेने से यूँही बस लेटे हुए ------ मिलाप सि...
कहने को तो बस वो हमसे रूठ जाते हैं उन्हें क्या पता इससे कितने हम टूट जाते हैं नफरत सी होने लगती है हर शय से हमें जीने के खाव सभी जैसे मन से ही छूट जाते हैं ----- मिलाप सिंह भरमौरी
रख कर हाथ रुखसारों पर मेरी याद में खोए होंगे । अंबर से इक बूँद गिरी है शायद वो वहाँ रोए होंगे । गवारा न था हमसे बिछुडना पल भर भी इक तन्हा रहना । मेरे बिन उस उजली छत पर कैसे वो तन...